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महारकलां गांव में एक ऐसा शिवालय, जहां सूर्य की गति के अनुसार घूमता है शिवलिंग..!

मालेश्वर महादेव मंदिर महारकलां सामोद का इतिहास एवं रोचक जानकारी

महारकलां गांव में एक ऐसा शिवालय, जहां सूर्य की गति के अनुसार घूमता है शिवलिंग..!

अरावली पहाड़ी की तलहटी पर बसा है मालेश्वर धाम मंदिर

महारकलां गांव में स्थित मालेश्वरधाम मंदिर की रोचक कहानी…

चौमूं। जयपुर जिले से करीब 40 किलोमीटर दूर चौमूं- अजीतगढ़ मार्ग पर स्थित महारकलां नाम का एक छोटा सा गांव..जहां पर स्थित है हिन्दुओं का पवित्र मालेश्वरधाम मंदिर। कई धरोहरों व हरियाली को समेटे यह गांव ऐतिहासिक दृस्टि से काफी महत्वपूर्ण है। गांव में खंडरनुमा इमारते इसकी प्राचीनता का एक उदाहरण है। यहाँ एक प्राचीन कालीन किला भी है जो यह दर्शाता है, कि यहाँ किसी जमाने में राजा महाराजाओं का वजूद रहा था। इसी गाँव से पश्चिम की ओर अरावली की सुरम्य पहाड़ी की तलहटी पर स्थित देवो के देव महादेव का पवित्र मालेश्वर धाम मंदिर हैं। यहाँ प्रतिवर्ष सावन व भादवे के मास के अलावा महाशिवरात्रि को लाखों की संख्या में लोग पहुंचते है। और सावन के महीने में कावड़िए यहां से कावड़ भरकर अनेक स्थानों पर लेकर जाते हैं।

मालेश्वरधाम मंदिर का इतिहास…..

अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित मालेश्वरधाम मंदिर काफी प्राचीन है। मंदिर के महंत महेश्वर दास ने बताया कि यहां कभी विशाल जंगल था। गायों का एक झुंड चरने आया करता था। उन्हीं गायों में से एक गाय प्रतिदिन एक निश्चित स्थान पर अपने दूध की धार एकसिला पर प्रवाहित करती थी। प्रदोष काल सोमवार को इस स्थान से पहाड़ के शीला को तोड़कर शिवलिंग स्वत: ही प्रकट हो गया। तभी से यहां मालेश्वरधाम महादेव की पूजा अर्चना की जाने लगी हैं। अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित मालेश्वरधाम मंदिर काफी प्राचीन है। मान्यता है कि यह ग्राम पहले महाबली राजा सहस्रबाहु की नगरी महेश पुरी (महिषमति नगरी) थी। शिव पुराण में इसका उल्लेख है। जिसे परशुराम जी की तपोस्थली भी कहा जाता है। इस वजह से इस गांव को महारकलां के नाम से जाना जाता है।

सूर्य की गति के अनुसार घूमता है शिवलिंग….

मंदिर के महंत महेश्वर दास ने बताया कि यहां स्थापित शिवलिंग सूर्य की गति के अनुसार घूमता है। सूर्य के उत्तरायण या दक्षिणायन होने के अनुरूप शिवलिंग भी उत्तरायण और दक्षिणायन की तरफ झुक जाता है। मंदिर के मंडप के स्तंभों पर अंकित 1101 ईसवी के शिलालेख हैं। मंदिर के गर्भ गृह में 2 फीट का शिवलिंग पहाड़ के चट्टान से बाहर निकला हुआ है। प्राचीनतम ग्रंथों के अनुसार करोड़ शिवलिंग की पूजा अर्चना करने से जो फल मिलता है। इससे करोड़ों गुना अधिक फल मालेश्वरधाम महादेव की पूजा अर्चना करने से सहज ही प्राप्त हो जाता है।

मुगल सेनाओं ने मूर्ति को खंडित करने का किया था प्रयास

मंदिर के महंत महेश्वर दास ने बताया कि मालेश्वरधाम मंदिर के पास ही विष्णु भगवान का मंदिर है जिसको औरंगजेब की सेनाओं ने खंडित कर दिया था। इस मंदिर की खंडित मूर्ति आज भी यहां मौजूद है। मुगल सेनाओं ने विष्णु की मूर्ति को तो खंडित कर दिया, लेकिन शिवलिंग को खंडित करने का प्रयास असफल रहा। जैसे ही मुग़ल सैनिकों ने गर्भ गृह में शिवलिंग को नष्ट करने के लिए प्रहार किए तो समीप के पहाड़ों से मधुमक्खियों ने मुगल सेना पर हमला बोल दिया जिससे सैनिकों को यहां से भागना पड़ा । शिवलिंग पर प्रहार करने के चिन्ह आज भी बने हुए हैं।

मालेश्वरधाम पिकनिक के लिए भी है अच्छा स्थान…

बारिश के मौसम में पहाड़ों पर हरियाली होने व झरनों के बहने से यह स्थान अत्यंत रमणीय हो जाता है। सावन मास में तो यहाँ लाखो की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के जलाभिषेक व दर्शनों के लिए पहुंचते है। बारिश में यहाँ के प्राकृतिक दृश्य सुख की अनुभूति का आनंद देते है। बहते प्राकृतिक झरनों का आनंद लेने के लिए दूर दूर से लोग अपने परिवार के साथ पिकनिक तक मनाने के लिए यहां आते है। कई बार तेज बारिश होने से पहाड़ों की तलहटी से बहते हुए झरने कभी लोग लुफ्त उठाते हुए नजर आते है। और महारकलां गांव के बीच बसे पुराने मकान आज भी है, जहां फिल्मों की शूटिंग भी की जाती थी।

महारकलां गांव में कई फिल्मों की हो चुकी है शूटिंग–

सामोद व महारकलां गांव की प्राकृतिक सुंदरता के चलते यह स्थान पर्यटन स्थल के रूप में काफी प्रसिद्ध है। यह गाँव फिल्मो के लिए भी अच्छी लोकेशन रहा है। यहां न जाने कितनी ही फिल्मो की शूटिंग हो चुकी है। जिनमें करण-अर्जुन, युगांधर, बटंवारा,ऐलान-ए-जंग, सोल्जर, कोयला,लोहा,औजार,मेहंदी,अमरसिंह राठौड़ जैसी कई हिट फिल्मों की यहां पर शूटिंग भी हो चुकी है।

कैसे पहुंचे महारकलां के मालेश्वरधाम मंदिर….

मालेश्वरधाम मंदिर में सबसे ज्यादा लोग महाशिवरात्रि व सावन, भादवे महीने में पहुंचते है। यदि आप सड़क मार्ग से दिल्ली की तरफ से आ रहे है तो  आपको शाहपुरा – अजीतगढ़ होते हुए आना होगा। या फिर आप जयपुर से आ रहे है तो आपको चौमूं होते हुए आना होगा। यदि आप रेलमार्ग से आने की सोच रहे है तो आपको जयपुर जंक्शन से चौमूं – सामोद रेलवे स्टेशन पर आना होगा। फिर आप चौमूं से रोडवेज बस, टैक्सी या प्राइवेट टैक्सी से पहुंच सकते हो। चौमूं से महारकलां की दूरी 13 किलोमीटर के लगभग ही है। और महारकलां बस स्टैंड से मंदिर की दूरी एक किलोमीटर के लगभग ही है। आप यहाँ घूमने का प्रोग्राम बना रहे है। तो ध्यान रहे यहां रात में रुकने की कोई व्यवस्था नहीं है। नाईट स्टे के लिए आपको सामोद व चौमूं इलाके की होटल में ही रुकना होगा। यदि आप कोई गोठ व सवामणी करने आ रहे है तो आपको यहां पूरी सुविधा निर्धारित शुल्क के साथ मिल जायगी।

 

महाशिवरात्रि पर होती है विशेष पूजा अर्चना—

महारकलां स्थित मालेश्वरधाम मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पर आते हैं। और भगवान भोलेनाथ का दूध,दही,जल,बिलपत्र और पुष्पा चढ़ाकर पूजा अर्चना की जाती है। वहीं सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।वहीं भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए गन्ने का रस भी पवित्र माना जाता है। वही सावन के महीने में लोग यहां पर काफी संख्या में आते हैं और भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना के बाद यहां पर सामूहिक गोठ व सवामणी कार्यक्रम आयोजन किए जाते हैं। यहां पर बारिश के दौरान हरियाली का मनोरम दृश्य देखने को भी मिलता है।

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